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@hygull

hygull/poem.md

Last active Jul 25, 2020
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Poem Hindi
कभी सपनों मे अपनों के सपनों को जरा सहेजना तो!
हो सकता है़!
कभी महसूस न किया तुमने होगा जो समझ आए वो!
यूँ बन वाचाल खुदा को बेवजह न तकलीफ़़ में डाल!
दे सकता है!
ये पुरे जमाने का दर्द; ज़रा समझ; न बन अतफ़ाल!
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